मध्य प्रदेश के तेजतर्रार IPS अधिकारी ने मांगा VRS, राष्ट्रपति पदक विजेता अभिषेक तिवारी ने क्यों छोड़ी सेवा?


 नई दिल्ली: मध्य प्रदेश कैडर के चर्चित और राष्ट्रपति पदक से सम्मानित आईपीएस अधिकारी अभिषेक तिवारी के अचानक स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेने के फैसले ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है. 2013 बैच के इस तेजतर्रार अधिकारी ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए पुलिस सेवा से इस्तीफा दे दिया है. उनका यह कदम इसलिए भी चौंकाने वाला माना जा रहा है, क्योंकि सेवा के अभी कई अहम वर्ष बाकी थे.

अभिषेक तिवारी फिलहाल दिल्ली में प्रतिनियुक्ति पर तैनात थे और नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (NTRO) में अपनी सेवाएं दे रहे थे. उनके इस्तीफे को महज एक पद छोड़ने का फैसला नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था में बढ़ते दबाव, बदलती प्राथमिकताओं और ‘ब्रेन ड्रेन’ से जोड़कर देखा जा रहा है. राष्ट्रपति से सम्मानित अधिकारी का इस तरह अचानक सिस्टम से बाहर होना कई सवाल खड़े कर रहा है.

मध्य प्रदेश में अपने कार्यकाल के दौरान अभिषेक तिवारी ने बालाघाट, शहडोल और रतलाम जैसे संवेदनशील जिलों में एसपी के रूप में प्रभावी काम किया. अपराध नियंत्रण के लिए उन्होंने तकनीक और डेटा एनालिटिक्स का जिस तरह इस्तेमाल किया, वह उन्हें अन्य अधिकारियों से अलग बनाता है. संगठित अपराध, साइबर क्राइम और नक्सल प्रभावित इलाकों में उनकी रणनीति की काफी सराहना हुई थी.

सूत्रों के मुताबिक, अभिषेक तिवारी के इस फैसले के पीछे निजी और पेशेवर कारण दोनों हो सकते हैं, हालांकि उन्होंने सार्वजनिक तौर पर किसी दबाव या विवाद से इनकार किया है. अब सवाल यही है कि क्या यह फैसला किसी नई करियर पारी की शुरुआत है या सिस्टम के भीतर बढ़ते तनाव का संकेत. फिलहाल, उनका इस्तीफा प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है.

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