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  बॉलीवुड एक्टर वरुण धवन इन दिनों हर तरफ छाए हुए हैं। अपने 14 साल लंबे फिल्मी करियर में उन्होंने एक से बढ़कर एक फिल्में दी हैं और अब उनकी नई फिल्म ‘बॉर्डर 2’ बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त धमाल मचा रही है। फिल्म को दर्शकों का शानदार रिस्पॉन्स मिल रहा है और कमाई के मामले में भी यह लगातार नए रिकॉर्ड की ओर बढ़ रही है।

वरुण धवन ने साल 2012 में ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’ से बॉलीवुड में कदम रखा था। इसके बाद उन्होंने ‘मैं तेरा हीरो’, ‘हम्प्टी शर्मा की दुल्हनिया’, ‘बद्रीनाथ की दुल्हनिया’, ‘जुड़वा 2’ और ‘ABCD 2’ जैसी कई सुपरहिट फिल्में दीं। उनकी फिल्मों ने यूथ के साथ-साथ फैमिली ऑडियंस को भी खूब एंटरटेन किया।

हालांकि करियर में उतार-चढ़ाव भी आए। ‘कलंक’ और ‘भेड़िया’ जैसी कुछ फिल्मों से उम्मीद के मुताबिक बॉक्स ऑफिस कलेक्शन नहीं मिला, लेकिन वरुण की लोकप्रियता पर इसका खास असर नहीं पड़ा। उन्होंने हर बार खुद को नए अवतार में पेश करने की कोशिश की।

अब ‘बॉर्डर 2’ के जरिए वरुण धवन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे सिर्फ रोमांटिक या कॉमेडी ही नहीं, बल्कि देशभक्ति और गंभीर किरदारों में भी दमदार परफॉर्मेंस दे सकते हैं। फिल्म की ओपनिंग से लेकर वीकेंड कलेक्शन तक आंकड़े मजबूत बने हुए हैं।

कुल मिलाकर, वरुण धवन का करियर इस वक्त एक बार फिर पीक मोड में नजर आ रहा है और ‘बॉर्डर 2’ उनकी हिट लिस्ट में एक और बड़ा नाम जोड़ती दिख रही है।

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  राजस्थान की सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा हमेशा से आपसी भाईचारे, समरसता और विविधता के सम्मान की प्रतीक रही है। इसी विरासत को मजबूत बनाए रखने के उद्देश्य से बुधवार को राजधानी जयपुर में सर्व किन्नर समाज एकजुट होकर सड़कों पर उतरा और अपनी आवाज़ बुलंद की।

किन्नर समाज के प्रतिनिधियों ने शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होकर सामाजिक सौहार्द, सम्मान और समान अधिकारों की बात कही। उनका कहना था कि राजस्थान की पहचान गंगा-जमुनी तहज़ीब और आपसी स्वीकार्यता से बनी है, जिसे किसी भी हाल में कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने समाज में फैली गलत धारणाओं और भेदभाव पर चिंता जताई और सरकार व समाज से किन्नर समुदाय को सम्मानजनक जीवन, सुरक्षा और समान अवसर देने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए है।

इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि राजस्थान की धरती पर भाईचारा और समरसता सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि जीने की परंपरा है—जिसे हर वर्ग मिलकर आगे बढ़ाएगा।Hashtags

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  देश के रेल यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की जबरदस्त लोकप्रियता को देखते हुए भारतीय रेलवे अब इसे और भी विशाल और दमदार बनाने जा रही है। गुवाहाटी से हावड़ा के बीच चल रही देश की पहली सेमी-हाईस्पीड स्लीपर वंदे भारत को यात्रियों से शानदार रिस्पॉन्स मिला है। बुकिंग खुलते ही कुछ ही घंटों में ट्रेन फुल हो जाना इस बात का सबूत है।

इसी बढ़ती मांग को देखते हुए रेलवे ने बड़ा फैसला लिया है। अब तक 16 कोच वाली वंदे भारत स्लीपर को जल्द ही 24 कोच की ट्रेन में बदला जाएगा। इसका सीधा फायदा यात्रियों को मिलेगा, क्योंकि ज्यादा सीटें जुड़ने से कंफर्म टिकट मिलने की संभावना भी बढ़ेगी।

रेल मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, वंदे भारत स्लीपर के संचालन के महज 10 दिनों के भीतर इसकी क्षमता बढ़ाने का फैसला कर लिया गया, जो इसकी सफलता को दर्शाता है। रेलवे का मकसद ज्यादा से ज्यादा यात्रियों को आधुनिक सुविधाओं के साथ तेज़, आरामदायक और सुरक्षित यात्रा का अनुभव देना है।

नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का लुक तेजस और राजधानी एक्सप्रेस जैसा प्रीमियम होगा, जबकि सुविधाओं के मामले में इसे ‘रेलवे का पुष्पक विमान’ कहा जा रहा है। इसमें आरामदायक स्लीपर बर्थ, आधुनिक इंटीरियर, बेहतर सस्पेंशन और हाई-स्पीड सफर का शानदार मेल मिलेगा।

रेलवे संकेत दे चुका है कि आने वाले समय में ऐसी और भी हाई-कैपेसिटी, प्रीमियम स्लीपर ट्रेनों की शुरुआत की जा सकती है। यानी वंदे भारत स्लीपर अब सिर्फ ट्रेन नहीं, बल्कि लंबी दूरी की यात्रा का नया स्टैंडर्ड बनने जा रही है।

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 साल 1988 में भारत ने अपनी सैन्य ताकत और तेज़ फैसले से मालदीव के तत्कालीन राष्ट्रपति मौमून अब्दुल गयूम की जान बचाई थी। यह ऐतिहासिक सैन्य अभियान ऑपरेशन कैक्टस (Operation Cactus) के नाम से जाना जाता है, जिसे आज भी भारत की सबसे सफल विदेशी सैन्य कार्रवाइयों में गिना जाता है।

दरअसल, नवंबर 1988 में मालदीव की राजधानी माले में तख्तापलट की साजिश रची गई थी। श्रीलंका के उग्रवादी संगठन PLOTE से जुड़े भाड़े के सैनिकों ने अचानक हमला कर एयरपोर्ट, सरकारी इमारतों और रेडियो स्टेशन पर कब्जा कर लिया। राष्ट्रपति मौमून अब्दुल गयूम को मारने या बंदी बनाने की योजना थी, लेकिन वे किसी तरह छिपकर अपनी जान बचाने में सफल रहे।

हालात बेकाबू होते देख राष्ट्रपति गयूम ने सीधे भारत से मदद मांगी। उस समय भारत के प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे। उन्होंने बिना किसी देरी के तुरंत सैन्य कार्रवाई का आदेश दिया। भारतीय वायुसेना के IL-76 विमान से पैरा कमांडो को रातों-रात माले भेजा गया।

भारतीय सैनिकों ने लैंड करते ही एयरपोर्ट को अपने कब्जे में लिया और दुश्मनों के बीच से रास्ता बनाते हुए राष्ट्रपति तक पहुंचे। कुछ ही घंटों में विद्रोहियों को काबू में कर लिया गया और राष्ट्रपति को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। पूरा ऑपरेशन 24 घंटे से भी कम समय में सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया।

ऑपरेशन कैक्टस ने न सिर्फ मालदीव की लोकतांत्रिक सरकार को बचाया, बल्कि भारत को हिंद महासागर क्षेत्र में एक जिम्मेदार और ताकतवर शक्ति के रूप में स्थापित किया।


  राजस्थान के जोधपुर से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। प्रसिद्ध कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। यह घटना ऐसे समय पर हुई है, जब कुछ महीने पहले उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होकर बड़े विवाद की वजह बना था। साध्वी प्रेम बाईसा को जोधपुर स्थित उनके आरती नगर आश्रम से गंभीर हालत में प्रेक्षा अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित करते हुए मृत बताया।

मौत के बाद मामला तब और रहस्यमयी हो गया, जब उनके इंस्टाग्राम अकाउंट से एक पोस्ट सामने आई। इस पोस्ट में लिखा था—
“जीते जी नहीं, जाने के बाद मिलेगा न्याय।”
इस संदेश ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि दावा किया जा रहा है कि यह पोस्ट उनकी मौत के बाद अपलोड की गई। इसी बिंदु पर पुलिस की जांच अब केंद्रित है।

साध्वी प्रेम बाईसा धार्मिक कथाओं और प्रवचनों के लिए जानी जाती थीं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु उनके प्रवचनों से जुड़े हुए थे। कुछ समय पहले वायरल हुए वीडियो को लेकर वे मानसिक दबाव में थीं—ऐसी चर्चाएं भी सामने आ रही हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है। परिवार और समर्थकों की ओर से हाई लेवल जांच की मांग की जा रही है। साध्वी की मौत ने धार्मिक और सामाजिक जगत में हलचल मचा दी है और सभी की नजरें अब जांच के नतीजों पर टिकी हैं।#SadhviPremBaisa #PremBaisaDeath #JodhpurNews #SadhviDeathMystery #ReligiousNews #ViralVideoCase #RajasthanNews #BreakingNews


  बारामती एयरपोर्ट पर हुए दर्दनाक विमान हादसे में एनसीपी नेता अजित पवार की असमय मौत ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में यह एक ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई संभव नहीं। ऐसे समय में उम्मीद थी कि राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर हर दल शोक संतप्त परिवार के साथ खड़ा होगा। लेकिन अफसोस, इस त्रासदी को भी राजनीतिक हथियार बना लिया गया।

विपक्षी खेमे के कुछ बड़े नेताओं ने बिना किसी ठोस सबूत के इस हादसे को “साजिश” करार देना शुरू कर दिया। ममता बनर्जी और मल्लिकार्जुन खरगे ने सीधे-सीधे केंद्र सरकार पर संदेह जताते हुए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग कर दी। सवाल यह नहीं है कि जांच हो या नहीं—जांच हर हादसे में होती है। सवाल यह है कि शोक की घड़ी में शक और आरोपों की राजनीति क्यों?

दिलचस्प बात यह है कि अजित पवार के अपने चाचा और वरिष्ठ नेता शरद पवार ने इस घटना को एक दुखद दुर्घटना बताते हुए साफ कहा है कि इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। जब परिवार का सबसे अनुभवी नेता संयम और संवेदना की बात कर रहा है, तब विपक्ष का एक वर्ग इस त्रासदी को मोदी-विरोध की स्क्रिप्ट में क्यों ढाल रहा है?

यह पहली बार नहीं है जब किसी हादसे को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया गया हो। लेकिन सवाल यह है कि क्या अब विपक्ष के पास लाशों पर राजनीति के अलावा कोई नैतिक रास्ता नहीं बचा? जनता सब देख रही है और शायद अब फैसला भी वही करेगी—कि संवेदना बड़ी है या सियासत

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 1988 में भारत ने एक साहसिक सैन्य कार्रवाई के ज़रिये मालदीव के तत्कालीन राष्ट्रपति मौमून अब्दुल गयूम की जान बचाई थी। यह मिशन इतिहास में ऑपरेशन कैक्टस (Operation Cactus) के नाम से दर्ज है। उस समय मालदीव की राजधानी माले में तख़्तापलट की कोशिश की गई थी। श्रीलंका के उग्रवादी संगठन PLOTE से जुड़े भाड़े के सैनिकों ने अचानक हमला कर सरकारी इमारतों, रेडियो स्टेशन और एयरपोर्ट पर कब्ज़ा कर लिया था।

राष्ट्रपति मौमून अब्दुल गयूम किसी तरह जान बचाकर छिपने में सफल रहे, लेकिन हालात बेहद ख़तरनाक थे। मालदीव की सेना छोटी थी और विद्रोहियों के सामने टिक नहीं पा रही थी। ऐसे संकट के समय राष्ट्रपति गयूम ने भारत से तत्काल मदद की गुहार लगाई।

तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने बिना देरी किए सैन्य हस्तक्षेप का फैसला लिया। भारतीय वायुसेना के IL-76 विमान से पैराशूट रेजिमेंट के जवानों को रातों-रात माले भेजा गया। भारतीय कमांडो ने एयरपोर्ट पर नियंत्रण हासिल किया और कुछ ही घंटों में विद्रोहियों को पीछे धकेल दिया।

भारतीय सैनिक दुश्मनों के बीच से रास्ता बनाते हुए राष्ट्रपति तक पहुंचे और उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। इस पूरे ऑपरेशन को 24 घंटे से भी कम समय में सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया। विद्रोही या तो मारे गए या गिरफ्तार कर लिए गए।

ऑपरेशन कैक्टस ने न सिर्फ मालदीव की लोकतांत्रिक सरकार को बचाया, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सैन्य क्षमता और विश्वसनीयता को भी साबित किया। यह मिशन आज भी भारत की तेज़, निर्णायक और जिम्मेदार विदेश नीति का प्रतीक माना जाता है।

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 बीते कुछ दिनों से भाजपा नेत्री अपर्णा यादव और उनके पति प्रतीक यादव के रिश्ते को लेकर तलाक की चर्चाएं तेज थीं। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इस मामले पर कयास लगाए जा रहे थे। लेकिन अब प्रतीक यादव ने इन अटकलों पर खुद ही विराम लगा दिया है।

प्रतीक यादव ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर पत्नी अपर्णा यादव के साथ एक तस्वीर साझा की है। इस फोटो में दोनों साथ नजर आ रहे हैं और चेहरे पर मुस्कान दिखाई दे रही है। तस्वीर के साथ प्रतीक यादव ने कैप्शन में लिखा, जिससे साफ संकेत मिल रहा है कि उनके वैवाहिक रिश्ते में सब ठीक है।

इस पोस्ट के सामने आते ही तलाक की खबरों पर ब्रेक लग गया है। सोशल मीडिया यूजर्स इस तस्वीर को दोनों के रिश्ते में आई सकारात्मकता के तौर पर देख रहे हैं। गौरतलब है कि अपर्णा यादव, समाजवादी पार्टी से अलग होकर भाजपा में शामिल हुई थीं और इसके बाद से वह लगातार चर्चा में रहती हैं।

हालांकि, इससे पहले इस जोड़े ने तलाक की अफवाहों पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया था, जिससे अटकलें और तेज हो गई थीं। अब प्रतीक यादव की इस पोस्ट को साफ तौर पर अफवाहों पर यू-टर्न माना जा रहा है। तस्वीर वायरल होते ही समर्थकों और फैंस ने राहत की सांस ली है और दोनों के लिए शुभकामनाएं दे रहे हैं।

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  पेड़-पौधे न केवल पर्यावरण को शुद्ध करते हैं, बल्कि भारतीय परंपरा, ज्योतिष और वास्तु शास्त्र में भी इनका विशेष महत्व बताया गया है। इन्हीं में से एक है नीम का पेड़, जिसे औषधीय गुणों का भंडार माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, नीम का पेड़ घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाता है और कई प्रकार की नकारात्मक शक्तियों से भी रक्षा करता है। हालांकि, इसे लगाते समय दिशा का विशेष ध्यान रखना जरूरी होता है।

वास्तु शास्त्र के अनुसार, नीम का पेड़ उत्तर-पश्चिम (वायव्य कोण) या पश्चिम दिशा में लगाना सबसे शुभ माना जाता है। इन दिशाओं में नीम लगाने से घर में स्वास्थ्य लाभ, शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। वहीं, नीम का पेड़ उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में लगाने से बचना चाहिए, क्योंकि यह दिशा पूजा और जल तत्व से जुड़ी मानी जाती है और यहां भारी या बड़े पेड़ लगाना अशुभ माना जाता है।

वास्तु विशेषज्ञों का कहना है कि नीम का पेड़ घर से थोड़ी दूरी पर लगाया जाए, ताकि उसकी छाया सीधे घर पर न पड़े। मान्यता है कि नीम की कड़वी प्रकृति नकारात्मक ऊर्जा को सोख लेती है और वातावरण को शुद्ध बनाती है। साथ ही, नीम का उपयोग आयुर्वेद में भी औषधि के रूप में किया जाता है, जिससे यह सेहत के लिए भी बेहद लाभकारी है।

यदि वास्तु नियमों का पालन करते हुए नीम का पेड़ लगाया जाए, तो यह घर में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और मानसिक शांति लाने में सहायक होता है।

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 रिपोर्ट्स के मुताबिक, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजित पवार का बुधवार सुबह एक चार्टर विमान हादसे में दुखद निधन हो गया। बताया जा रहा है कि यह हादसा बारामती में लैंडिंग के दौरान हुआ, जिसमें विमान में सवार सभी छह लोगों की मौत हो गई। इस खबर के सामने आते ही महाराष्ट्र समेत पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई।

सूत्रों के अनुसार, अजित पवार मुंबई से बारामती जा रहे थे, जहां उन्हें जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों के बीच एक जनसभा में शामिल होना था। सुबह करीब 9 बजे विमान लैंडिंग के दौरान नियंत्रण खो बैठा और दुर्घटनाग्रस्त हो गया। क्रैश के बाद विमान में आग लगने की भी सूचना है। डीजीसीए की ओर से भी सभी यात्रियों के निधन की पुष्टि किए जाने की बात कही जा रही है।

अजित पवार के निधन की खबर के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे बारामती पहुंचकर उनकी पत्नी और परिवार से मिले और गहरा दुख व्यक्त किया। दोनों नेताओं ने इसे राज्य के लिए अपूरणीय क्षति बताया। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कई राष्ट्रीय-राज्य नेताओं ने भी शोक संदेश जारी किए हैं।

पवार परिवार में मातम का माहौल है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अंतिम संस्कार आज ही बारामती में किए जाने की तैयारी है। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां घटनास्थल पर मौजूद हैं और हादसे की जांच की जा रही है। अजित पवार के आकस्मिक निधन की खबर ने राज्य की राजनीति और आम जनता—दोनों को स्तब्ध कर दिया है।

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 राजस्थान के धौलपुर शहर में सीवरेज की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। शहर की खोसला विहार, मयूरी नगर, बाबा सिंह नगर समेत कई आसपास की कॉलोनियों में इन दिनों गंदे पानी का जमाव लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। रेलवे लाइन के नीचे बनी पुलिया, जो कभी बारिश के पानी की निकासी के लिए बनाई गई थी, अब सीवर के गंदे पानी का रास्ता बन चुकी है।

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि दो दिन पहले रेलवे लाइन के दूसरी ओर स्थित कुछ कॉलोनियों के लोगों ने पुलिया को खोल दिया, जिसके बाद नारायण विहार, हुंडावाल नगर और अन्य इलाकों का सीवरेज का पानी खोसला विहार और मयूरी नगर की तरफ मोड़ दिया गया। इसके चलते घरों के आसपास बदबूदार पानी भर गया है और पूरे इलाके में दुर्गंध फैल गई है।

हालात ऐसे हो गए हैं कि महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग घर से बाहर निकलने में डर महसूस कर रहे हैं। सड़कों और गलियों में भरे गंदे पानी के कारण रोजमर्रा की आवाजाही प्रभावित हो रही है। वहीं, लोगों को डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों के फैलने का भी डर सता रहा है।

निवासियों का कहना है कि इस समस्या की जानकारी कई बार नगर परिषद को दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे मजबूरन सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करेंगे। स्थानीय लोग प्रशासन से जल्द राहत की मांग कर रहे हैं।

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 महाराष्ट्र के बारामती में हुए दर्दनाक विमान हादसे ने कई जिंदगियों को हमेशा के लिए थाम दिया। इस हादसे में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले की रहने वाली पिंकी माली की भी मौत हो गई। पिंकी इस विमान में क्रू मेंबर के तौर पर तैनात थीं। जैसे ही उनकी मौत की खबर जौनपुर के केराकत तहसील स्थित भैंसा गांव पहुंची, पूरे गांव में मातम पसर गया।

पिंकी माली, भैंसा गांव निवासी शिवकुमार माली की बेटी थीं। परिवार करीब 20 साल पहले रोजगार की तलाश में मुंबई चला गया था, तभी से पिंकी भी वहीं रहकर अपने सपनों को आकार दे रही थीं। रिश्तेदारों के मुताबिक, पिंकी हाल के दिनों में बार-बार गांव आने की बात कर रही थीं और परिवार से मिलने की इच्छा जता रही थीं, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।

परिजनों ने बताया कि पिंकी का स्वभाव बेहद सरल, मेहनती और मिलनसार था। उन्होंने कुछ महीनों पहले ही शादी की थी और नई जिंदगी की शुरुआत को लेकर खुश थीं। गांव के लोगों का कहना है कि पिंकी हमेशा सबकी मदद को तैयार रहती थीं, इसलिए उनका यूं अचानक चला जाना पूरे समाज के लिए बड़ी क्षति है।

हादसे की खबर के बाद से परिवार गहरे सदमे में है। गांव के हर घर में शोक है और हर आंख नम। पिंकी की कहानी उस दर्द की याद दिलाती है, जो एक पल में कई सपनों को राख में बदल देता है।

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  एचएएल ने सुपरजेट-100 बनाने के ल‍िए रूस की कंपनी के साथ बड़ी डील की है.

भारत में जल्द ही यात्रियों को मेक इन इंडिया पैसेंजर विमान में सफर करने का मौका मिल सकता है। लड़ाकू विमानों के निर्माण में अपनी ताकत साबित कर चुकी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) अब कमर्शियल एविएशन सेक्टर में भी बड़ा कदम रखने जा रही है। इसके लिए HAL और रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन (UAC) के बीच एक अहम समझौता हुआ है।

इस डील के तहत भारत में रूसी डिजाइन वाला सुखोई सुपरजेट-100 (SSJ-100) विमान तैयार किया जाएगा। यह वही सुखोई परिवार का विमान है, जिसकी पहचान मजबूती और विश्वसनीयता के लिए होती है, लेकिन सुपरजेट-100 को खासतौर पर पैसेंजर ट्रैवल के लिए डिजाइन किया गया है। इसे छोटे रनवे पर उड़ान भरने और उतरने की क्षमता के कारण “छोटे रनवे का बाहुबली” कहा जाता है।

समझौते पर UAC के सीईओ वादिम बादेहा और HAL के चेयरमैन डॉ. डी.के. सुनील ने हस्ताक्षर किए हैं। इस करार के तहत HAL को भारत में सुपरजेट-100 के निर्माण का लाइसेंस मिलेगा। इतना ही नहीं, इस विमान की बिक्री, मरम्मत और रखरखाव (MRO) की जिम्मेदारी भी HAL के पास होगी।

रूसी कंपनी UAC इस परियोजना में तकनीकी सहयोग और डिजाइन सपोर्ट उपलब्ध कराएगी, जिससे HAL की फैक्ट्रियों में इस आधुनिक विमान का उत्पादन संभव हो सके। जानकारों का मानना है कि यह डील भारत के क्षेत्रीय हवाई संपर्क, रोजगार सृजन और एविएशन सेक्टर को नई मजबूती देगी।