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 देहरादून के फूड लवर्स के लिए बड़ी खुशखबरी है। अब जापानी एनिमी फिल्मों और कार्टून में नजर आने वाली मशहूर डिश सुशी (Sushi) का असली स्वाद शहर में ही चखा जा सकता है। जापान जाने का सपना भले पूरा न हो, लेकिन देहरादून के डियाबलो रेस्टोरेंट में अब ऑरिजिनल जापानी स्टाइल सुशी परोसी जा रही है।

इस खास डिश को तैयार कर रहे हैं रेस्टोरेंट के शेफ भरत नेगी, जिन्होंने ओमान के एक फाइव स्टार होटल में काम करने के बाद दिल्ली में अनुभव हासिल किया और अब देहरादून में इंटरनेशनल फ्लेवर लेकर आए हैं। शेफ भरत के मुताबिक, सुशी बनाने के लिए खास किस्म के स्टार्चयुक्त चावल का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे खासतौर पर जापान से मंगवाया जाता है।

सुशी की सबसे अहम पहचान है इसकी नोरी शीट—काले रंग की क्रिस्पी सीवीड शीट, जो स्वाद के साथ-साथ इसकी बनावट को भी खास बनाती है। सही तापमान, चावल की परफेक्ट बनावट और ताजे इंग्रेडिएंट्स के साथ तैयार की गई यह सुशी न सिर्फ स्वादिष्ट है, बल्कि पौष्टिक भी मानी जाती है।

देहरादून के लोगों के लिए यह किसी ट्रीट से कम नहीं है। अब जापानी कल्चर और फ्लेवर का अनुभव लेने के लिए विदेश जाने की जरूरत नहीं, क्योंकि एनिमी फिल्मों वाली सुशी अब आपके अपने शहर में, वो भी ऑथेंटिक टेस्ट के साथ उपलब्ध 


  हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले से इंसान और जानवर की वफादारी की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो हर किसी की आंखें नम कर देगी। भरमौर क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध भरमाणी मंदिर के पास जंगल में लापता हुए दो युवकों के शव बरामद किए गए हैं। इस दर्दनाक हादसे में सबसे भावुक कर देने वाली बात यह रही कि एक युवक का पालतू पिटबुल डॉगी चार दिनों तक भीषण बर्फबारी, भूख और प्यास के बावजूद अपने मालिक के शव के पास डटा रहा और उसे अकेला नहीं छोड़ा।

जानकारी के मुताबिक, विकसित राणा और पीयूष मंदिर में दर्शन करने के बाद आसपास के ऊंचाई वाले इलाके में वीडियो बनाने के लिए गए थे। इसी दौरान अचानक भारी बर्फबारी हो गई और दोनों युवक जंगल में फंस गए। 23 जनवरी को इलाके में पांच फीट से अधिक बर्फ गिरने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन भी मुश्किल हो गया।

चार दिन बाद जब रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची तो वहां का दृश्य बेहद भावुक कर देने वाला था। एक युवक के शव के पास उसका पालतू पिटबुल कुत्ता बैठा हुआ था, जो न तो वहां से हटा और न ही किसी को शव के करीब आने से रोकने की कोशिश छोड़ी। ठंड, भूख और डर के बावजूद डॉगी ने अपने मालिक की आखिरी पहरेदारी निभाई।

स्थानीय लोगों और रेस्क्यू टीम के सदस्यों के अनुसार, यह दृश्य देखकर सभी की आंखें भर आईं। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि कुत्तों की वफादारी सिर्फ कहानियों या फिल्मों तक सीमित नहीं है, बल्कि असल जिंदगी में भी वे इंसानों से कहीं ज्यादा निष्ठावान होते हैं। हिमाचल की बर्फीली वादियों से आई यह कहानी आज पूरे देश को भावुक कर रही है।


 यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन नौ दिवसीय भारत यात्रा पर हैं और आज उन्होंने भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस ऐतिहासिक अवसर पर उनके साथ यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा भी उपस्थित रहे। नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित इस भव्य समारोह में भारत की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता और लोकतांत्रिक परंपराओं का प्रभावशाली प्रदर्शन किया गया।

गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होकर वॉन डेर लेयेन ने भारत की समृद्ध विरासत, अनुशासित सशस्त्र बलों और जीवंत सांस्कृतिक झांकियों की सराहना की। उन्होंने इसे अपने लिए सम्मान और प्रेरणादायक अनुभव बताया। इस अवसर ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच रणनीतिक साझेदारी, लोकतांत्रिक मूल्यों और वैश्विक सहयोग को और मजबूत करने का संदेश दिया।

विशेषज्ञों के अनुसार, वॉन डेर लेयेन की यह यात्रा भारत–यूरोपीय संघ संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है। रक्षा, व्यापार, जलवायु परिवर्तन, तकनीक और वैश्विक शांति जैसे मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। गणतंत्र दिवस समारोह में उनकी मौजूदगी भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी साख को भी दर्शाती है।


  वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर में औरंगजेब काल से चली आ रही प्राचीन परंपरा को पुनः सक्रिय किया गया है। परिसर की पश्चिमी दीवार पर मां श्रृंगार गौरी का भव्य पूजन किया गया, जो ऐतिहासिक रूप से कई शताब्दियों से यहां होती आ रही है।

पूजा के साथ ही नौ दिवसीय राम कथा का आयोजन भी किया गया, जिसे सीधे बाबा विश्वनाथ को सुनाया जाता है। इस कथा का उद्देश्य श्रद्धालुओं को धार्मिक, आध्यात्मिक और नैतिक शिक्षा देना है। 1991 में यह परंपरा बंद हो गई थी, लेकिन योगी सरकार के कार्यकाल में इसे पिछले तीन वर्षों से भव्य रूप में पुनः शुरू किया गया है।

श्रद्धालुओं का मानना है कि इस आयोजन से धार्मिक उर्जा का संचार होता है और लोग अपने जीवन में सुख-शांति और समृद्धि का अनुभव कर सकते हैं। श्रृंगार गौरी की पूजा विशेष रूप से महिलाओं के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है।

इस परंपरा का इतिहास औरंगजेब काल से जुड़ा है। कहा जाता है कि उस समय भी यहाँ पूजा और कथा का आयोजन नियमित रूप से होता रहा था, जो धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा रही है। वर्तमान में यह आयोजन वाराणसी के धार्मिक पर्यटन और स्थानीय संस्कृति को भी मजबूती प्रदान करता है।

श्रद्धालु, अधिकारी और स्थानीय नागरिक इस प्राचीन परंपरा को जीवित रखने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, जिससे काशी की धार्मिक विरासत का संरक्षण होता है

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 अमेरिका के ग्रीनलैंड समझौते के प्रस्ताव ने वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ा दी है। निवेशक सौदे की पूरी जानकारी का इंतजार कर रहे हैं, जबकि अधूरी खबरों और संभावित टैरिफ की आशंका से शेयर बाजार में बेचैनी का माहौल बना हुआ है।

बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट के अनुसार, निवेशक सौदे के बारीक पहलुओं को समझने का इंतजार कर रहे हैं। ग्रीनलैंड में अमेरिका की सैन्य मौजूदगी, खनिज संसाधन और संप्रभुता जैसे संवेदनशील मुद्दे डील को जटिल बना सकते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह प्रस्तावित फ्रेमवर्क 1951 में अमेरिका और डेनमार्क के बीच हुए सुरक्षा करार के अपडेट जैसा हो सकता है, लेकिन अभी तक स्पष्ट रूप से नहीं पता कि नया ढांचा कैसे होगा।

अमेरिका की ग्रीनलैंड में दिलचस्पी सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं है। वहां तेल, गैस और रेयर अर्थ एलिमेंट्स जैसे कीमती खनिज संसाधन हैं, जिन पर अमेरिका की नजर है। यही वजह है कि यह मुद्दा केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि रणनीतिक और आर्थिक रूप से भी महत्वपूर्ण बन गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अधूरी जानकारी और संभावित टैरिफ के डर से वैश्विक निवेशक सतर्क हैं। इस स्थिति में निकट भविष्य में शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।

 


  यमुना नदी में अमोनिया का स्तर खतरनाक सीमा तक पहुंचने और मुनक नहर की मरम्मत के चलते दिल्ली में पानी की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हो गई है। उत्तर और पश्चिम दिल्ली के लाखों लोग बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। हालात 4 फरवरी तक सामान्य होने की उम्मीद नहीं है।

राजधानी दिल्ली इस वक्त गंभीर जल संकट के दौर से गुजर रही है। यमुना नदी में अमोनिया का स्तर 3 पीपीएम तक पहुंच गया है, जबकि दिल्ली के जल शोधन संयंत्र अधिकतम 1 पीपीएम तक ही गंदगी को संभाल सकते हैं। इस वजह से वजीराबाद और हैदरपुर जैसे बड़े वाटर ट्रीटमेंट प्लांट अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहे है

स्थिति तब और बिगड़ गई जब हरियाणा की ओर से मुनक नहर की मरम्मत के चलते दिल्ली ब्रांच नहर से साफ पानी की आवक पूरी तरह रोक दी गई। इसका सीधा असर उत्तर, पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के इलाकों पर पड़ा है। द्वारका, नांगलोई, बवाना, रोहिणी और आजादपुर जैसे क्षेत्रों में नल सूखे पड़े हैं।


 28 जनवरी को शनि और शुक्र के बीच 45 डिग्री का विशेष संयोग बन रहा है, जिससे अर्धकेंद्र योग का निर्माण होगा। वैदिक ज्योतिष के अनुसार यह योग कुछ राशियों के लिए अचानक धन, मान-सम्मान और तरक्की का कारण बन सकता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य ने इसे “रंक से राजा बनने जैसा समय” बताया है।

उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, 28 जनवरी की सुबह 7 बजकर 29 मिनट पर शनि और शुक्र एक-दूसरे से 45 डिग्री की स्थिति में होंगे। इस ग्रह स्थिति से अर्धकेंद्र योग बनता है, जिसे ज्योतिष में अत्यंत प्रभावशाली माना गया है।
वर्तमान में शनि मीन राशि में गोचर कर रहे हैं, जबकि शुक्र मकर राशि में सूर्य, मंगल और बुध के साथ युति में हैं। ऐसे में कर्मफल दाता शनि और सुख-संपत्ति के कारक शुक्र का यह संयोग कुछ राशियों के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है।

ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस दुर्लभ योग का सबसे अधिक प्रभाव तीन राशियों पर पड़ने वाला है। इन राशियों के जातकों को करियर में उछाल, रुका हुआ धन मिलने, व्यापार में लाभ और सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ने के संकेत हैं। लंबे समय से संघर्ष कर रहे लोगों के लिए यह समय भाग्य पलटने वाला साबित हो सकता है।


 महाभारत के सबसे महान और त्यागमयी पात्रों में गिने जाने वाले गंगापुत्र भीष्म की मृत्यु से जुड़ी तिथि को भीष्म अष्टमी के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व माघ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को आता है। इस दिन धर्म, कर्तव्य और संयम की अद्भुत मिसाल बने भीष्म पितामह का स्मरण किया जाता है।

कुरुक्षेत्र युद्ध के दसवें दिन अर्जुन ने शिखंडी को आगे रखकर भीष्म पर बाणों की वर्षा की। भीष्म का शरीर बाणों से छलनी हो गया, लेकिन वे तत्काल मृत्यु को प्राप्त नहीं हुए। इसका कारण था—इच्छा मृत्यु का वरदान

भीष्म को यह वरदान उनके पिता राजा शांतनु से मिला था। गंगा से विवाह की शर्तों के कारण भीष्म ने आजीवन ब्रह्मचर्य और सिंहासन त्याग का कठोर व्रत लिया था। अपने पुत्र के इस महान त्याग से प्रसन्न होकर राजा शांतनु ने उन्हें वरदान दिया कि वे अपनी मृत्यु का समय स्वयं चुन सकेंगे

महाभारत के अनुसार, भीष्म ने युद्धभूमि में ही प्राण त्यागने से इनकार कर दिया और उत्तरायण काल का इंतजार किया। हिंदू धर्म में उत्तरायण को मोक्षदायी काल माना जाता है। उस समय सूर्य दक्षिणायन में था, इसलिए भीष्म लगभग 58 दिनों तक बाणों की 


 धनबाद। कोयलांचल की पहचान लंबे समय तक सिर्फ कोयले तक सीमित रही, लेकिन अब झरिया से एक ऐसी शख्सियत उभरकर सामने आई है, जो शिक्षा के जरिए इलाके की तस्वीर बदल रही है। झरिया के नवीन कुमार, जिन्हें छात्र प्यार से ‘खान सर’ कहकर बुलाते हैं, दिन में सरकारी नौकरी करते हैं और रात में सैकड़ों युवाओं को अफसर बनने का रास्ता दिखा रहे हैं।

नवीन कुमार पिछले 9 वर्षों से आयकर विभाग, धनबाद में कार्यरत हैं। रोजाना 8 घंटे की ड्यूटी पूरी करने के बाद भी उनका हौसला थकता नहीं। नौकरी के बाद वे झरिया के हटली बांध क्षेत्र पहुंचते हैं, जहां वे बिल्कुल मुफ्त कोचिंग के जरिए छात्रों को SSC, रेलवे और बैंकिंग परीक्षाओं की तैयारी कराते हैं।

पिछले तीन वर्षों से वे अपने पिता की स्मृति में श्री शंभू कॉम्पिटेटिव क्लासेस का संचालन कर रहे हैं। इस संस्थान का उद्देश्य उन गरीब और मध्यमवर्गीय छात्रों को आगे बढ़ाना है, जो महंगी कोचिंग का खर्च नहीं उठा सकते। फिलहाल इस कोचिंग से करीब 600 छात्र-छात्राएं जुड़े हुए हैं।

नवीन कुमार सुबह 7 से 9 बजे और शाम 7 से रात 10 बजे तक छात्रों को पढ़ाते हैं। उनकी कक्षाओं में सब्जी विक्रेताओं, ऑटो चालकों और दिहाड़ी मजदूरों के बच्चे बैठते हैं, जिनकी आंखों में जीएसटी इंस्पेक्टर, बैंक अफसर और रेलवे अधिकारी बनने के सपने हैं।

नवीन कुमार का मानना है कि शिक्षा सिर्फ करियर नहीं, बल्कि समाज को बदलने का सबसे मजबूत हथियार है। उनकी यह निस्वार्थ पहल झरिया ही नहीं, पूरे धनबाद जिले के लिए प्रेरणा बनती जा रही है।


 


 जांजगीर-चांपा। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत आगामी सामूहिक विवाह कार्यक्रम के लिए पात्र परिवारों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। योजना का लाभ लेने के इच्छुक हितग्राही 31 जनवरी 2026 तक अनिवार्य रूप से संबंधित परियोजना कार्यालय में पंजीकरण करा सकते हैं। तय समयसीमा के बाद आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

महिला एवं बाल विकास विभाग की अधिकारी अनिता अग्रवाल ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के विवाह में सहयोग करना है। योजना के अंतर्गत केवल उन्हीं जोड़ों को शामिल किया जाता है, जिनका यह प्रथम विवाह हो। नियमों के अनुसार वर की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और वधु की आयु 18 वर्ष निर्धारित की गई है।

आवेदन के दौरान हितग्राहियों को 50 रुपये के स्टांप पेपर पर शपथ पत्र देना होगा, जिसमें विवाह की स्थिति और आयु संबंधी जानकारी दर्ज होगी। आवेदन पत्र का सत्यापन संबंधित ग्राम की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और ग्राम पंचायत के सरपंच द्वारा किया जाएगा। सत्यापन के बाद प्रकरण परियोजना कार्यालय में जमा किया जाएगा और चयनित जोड़ों को सामूहिक विवाह कार्यक्रम में शामिल होने की सूचना दी जाएगी।

योजना के तहत मिलने वाली सहायता की बात करें तो शासन द्वारा प्रति जोड़ा कुल 50,000 रुपये की सहायता दी जाती है। इसमें से 36,000 रुपये चेक के माध्यम से वर-वधु को प्रदान किए जाते हैं, जबकि 14,000 रुपये मूल्य के उपहार दिए जाते हैं। इन उपहारों में घरेलू उपयोग की सामग्री जैसे कुकर, अलमारी, बर्तन, गद्दा, तकिया, चादर, कपड़े, मंगलसूत्र और गृहस्थ जीवन के लिए आवश्यक अन्य सामान शामिल हैं।

 


  नई दिल्ली। जॉइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन मेन (JEE Main) 2026 के जनवरी सेशन के तहत 24 जनवरी को बीटेक/बीई की मॉर्निंग शिफ्ट की परीक्षा सफलतापूर्वक आयोजित की गई। यह परीक्षा सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक चली। परीक्षा में शामिल छात्रों और विषय विशेषज्ञों के मुताबिक, पेपर का ओवरऑल लेवल मध्यम (Moderate) रहा।

तीनों विषय—फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स—का कठिनाई स्तर लगभग संतुलित देखा गया, हालांकि मैथ्स को अपेक्षाकृत थोड़ा कठिन और समय लेने वाला बताया गया। कई छात्रों ने कहा कि मैथ्स में कैलकुलेशन आधारित सवाल ज्यादा थे, जिससे टाइम मैनेजमेंट चुनौतीपूर्ण रहा।

पेपर पैटर्न की बात करें तो JEE Main बीटेक पेपर में हर विषय को दो सेक्शन में बांटा गया था। सेक्शन-A में 20 मल्टीपल चॉइस प्रश्न थे, जबकि सेक्शन-B में 5 न्यूमेरिकल वैल्यू आधारित प्रश्न पूछे गए। पेपर पूरी तरह से एनटीए द्वारा निर्धारित सिलेबस पर आधारित था।

टॉपिक-वाइज ट्रेंड देखें तो फिजिक्स में इलेक्ट्रोस्टैटिक्स, करंट इलेक्ट्रिसिटी और मॉडर्न फिजिक्स से सवाल ज्यादा आए। केमिस्ट्री में फिजिकल और इनऑर्गेनिक के प्रश्न अपेक्षाकृत आसान रहे, जबकि ऑर्गेनिक से कॉन्सेप्ट-बेस्ड सवाल पूछे गए। मैथ्स में कैलकुलस, वेक्टर और 3D जियोमेट्री का वर्चस्व रहा।

आने वाली शिफ्ट्स में परीक्षा देने वाले छात्रों के लिए यह एनालिसिस रणनीति बनाने में मददगार साबित हो सकता है, खासकर टाइम मैनेजमेंट और हाई-वेटेज टॉपिक्स पर फोकस करने के लिहाज से।


 नई दिल्ली। भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद देश की राजनीति में बयानबाज़ी तेज हो गई है। भाजपा की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के “मथुरा और काशी का स्थायी समाधान होना चाहिए” वाले बयान पर कांग्रेस नेता उदित राज ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने दावा किया कि देश के 99 प्रतिशत मंदिर बौद्ध स्थलों के ऊपर बनाए गए हैं।

समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में उदित राज ने कहा कि तिरुपति, पुरी और केदारनाथ जैसे प्रमुख तीर्थस्थल मूल रूप से बौद्ध स्थल रहे हैं, जबकि मथुरा और काशी बौद्ध धर्म के बड़े केंद्र थे। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर इतिहास की खुदाई लगातार की जाएगी, तो क्या हिंदू मंदिरों की बुनियाद पर भी सवाल खड़े नहीं होंगे।

उदित राज ने कहा, “अगर कभी बौद्धों का शासन आ गया, तो क्या वे हिंदू मंदिरों को तोड़ेंगे? क्या उनकी नींव उखाड़ दी जाएगी?” उन्होंने आरोप लगाया कि इतिहास को राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंच रहा है।

कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि भारत में अलग-अलग सभ्यताएं और धर्म समय-समय पर आए हैं और हर दौर में सांस्कृतिक परिवर्तन हुए हैं। मंदिरों और मस्जिदों के नीचे बौद्ध अवशेष मिलने की बात कहते हुए उन्होंने भाजपा पर देश को विभाजित करने का आरोप लगाया।

इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में नई बहस छिड़ गई है और इतिहास, धर्म व राजनीति के आपसी संबंधों पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।


 नई दिल्ली: मध्य प्रदेश कैडर के चर्चित और राष्ट्रपति पदक से सम्मानित आईपीएस अधिकारी अभिषेक तिवारी के अचानक स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेने के फैसले ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है. 2013 बैच के इस तेजतर्रार अधिकारी ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए पुलिस सेवा से इस्तीफा दे दिया है. उनका यह कदम इसलिए भी चौंकाने वाला माना जा रहा है, क्योंकि सेवा के अभी कई अहम वर्ष बाकी थे.

अभिषेक तिवारी फिलहाल दिल्ली में प्रतिनियुक्ति पर तैनात थे और नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (NTRO) में अपनी सेवाएं दे रहे थे. उनके इस्तीफे को महज एक पद छोड़ने का फैसला नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था में बढ़ते दबाव, बदलती प्राथमिकताओं और ‘ब्रेन ड्रेन’ से जोड़कर देखा जा रहा है. राष्ट्रपति से सम्मानित अधिकारी का इस तरह अचानक सिस्टम से बाहर होना कई सवाल खड़े कर रहा है.

मध्य प्रदेश में अपने कार्यकाल के दौरान अभिषेक तिवारी ने बालाघाट, शहडोल और रतलाम जैसे संवेदनशील जिलों में एसपी के रूप में प्रभावी काम किया. अपराध नियंत्रण के लिए उन्होंने तकनीक और डेटा एनालिटिक्स का जिस तरह इस्तेमाल किया, वह उन्हें अन्य अधिकारियों से अलग बनाता है. संगठित अपराध, साइबर क्राइम और नक्सल प्रभावित इलाकों में उनकी रणनीति की काफी सराहना हुई थी.

सूत्रों के मुताबिक, अभिषेक तिवारी के इस फैसले के पीछे निजी और पेशेवर कारण दोनों हो सकते हैं, हालांकि उन्होंने सार्वजनिक तौर पर किसी दबाव या विवाद से इनकार किया है. अब सवाल यही है कि क्या यह फैसला किसी नई करियर पारी की शुरुआत है या सिस्टम के भीतर बढ़ते तनाव का संकेत. फिलहाल, उनका इस्तीफा प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है.