उदयपुर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा प्रतिवर्ष मनाया जाने वाला वर्ष प्रतिपदा उत्सव इस वर्ष उदयपुर महानगर में विशेष स्वरूप में उत्साहपूर्वक मनाया गया। संघ की दृष्टि से उदयपुर को महानगर का स्वरूप देते हुए इसे 11 इकाइयों में विभाजित किया गया है, जिनमें 9 नगर और 2 ग्रामीण खंड शामिल हैं। इस बार उत्सव सामूहिक रूप से आयोजित करने के बजाय प्रत्येक इकाई स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिससे स्थानीय स्तर पर अधिक व्यापक सहभागिता देखने को मिली।
उत्सव के अंतर्गत माधव नगर, केशव नगर, समर्थ गुरु नगर, हारीत नगर, बप्पा रावल नगर, छत्रपति शिवाजी नगर, विवेकानन्द नगर, सावरकर नगर और रामकृष्ण नगर सहित एकलिंग खंड तथा झामेश्वर खंड के विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित हुए। सभी स्थानों पर स्वयंसेवकों, नागरिकों और मातृशक्ति की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
कार्यक्रमों में वक्ताओं ने वर्ष प्रतिपदा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए भारतीय कालगणना की वैज्ञानिकता और उसकी प्राचीन परंपरा को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि वर्ष प्रतिपदा केवल नववर्ष का आरंभ नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, इतिहास और आत्मगौरव का प्रतीक है। क्षेत्र सेवा प्रमुख शिवलहरी ने भारतीय कालगणना की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह प्रकृति आधारित और वैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत सटीक प्रणाली है, जो भारतीय सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ बनाती है।
समर्थ गुरु नगर में आयोजित कार्यक्रम में क्षेत्र प्रचारक प्रमुख श्रीवर्धन ने समाज की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश की सीमाएं सुरक्षित हैं और सेना पूरी तरह सतर्क है, लेकिन समाज की आंतरिक सुरक्षा तथा संस्कारों की रक्षा का दायित्व समाज को स्वयं निभाना होगा। उन्होंने स्वयंसेवकों से सामाजिक समरसता, जागरूकता और संगठन को मजबूत बनाने का आह्वान किया।
वीर सावरकर नगर में कार्यक्रम की अध्यक्षता बलिदानी अभिनव नागौरी के माता-पिता सुशीला देवी और धर्मचंद्र नागौरी ने की। वहीं सह प्रांत प्रचारक डॉ. धर्मेंद्र सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. हेडगेवार के संकल्प और संघर्ष का ही परिणाम है कि संघ आज अपने 100 वर्ष पूर्ण कर चुका है और वर्तमान समय में पूरा विश्व भारत की ओर आशा और अपेक्षा से देख रहा है।
उन्होंने ‘पंच परिवर्तन’ के माध्यम से समाज जागरण का आह्वान करते हुए कहा कि ‘स्व’ के भाव के जरिए भारतीय संस्कृति और परंपराओं के प्रति गौरव की भावना जगानी होगी। सामाजिक समरसता के माध्यम से सभी वर्गों के बीच समानता और सद्भाव स्थापित करना आवश्यक है। साथ ही पर्यावरण संरक्षण को केवल पौधारोपण तक सीमित न रखते हुए लगाए गए पौधों के संरक्षण का भी दायित्व निभाना चाहिए। कुटुंब प्रबोधन के माध्यम से परिवार में संस्कारों का विकास और नागरिक कर्तव्य के प्रति जागरूकता भी समाज निर्माण की महत्वपूर्ण आधारशिला है।
कार्यक्रम में नगर संघचालक पवन और विभाग संघचालक हेमेन्द्र श्रीमाली की गरिमामयी उपस्थिति रही।
छत्रपति शिवाजी नगर में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट कर्नल ने की, जबकि बौद्धिक व्याख्यान डॉ. पुष्कर लोहार ने दिया। इस कार्यक्रम में संघचालक प्रकाश फुलानी भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में स्वयंसेवकों द्वारा शारीरिक प्रदर्शन और घोष दल की प्रस्तुति विशेष आकर्षण का केंद्र रही।
माधव नगर में कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. प्रवीण यादव ने की तथा बौद्धिक नारायण द्वारा प्रस्तुत किया गया। संघचालक हीरालाल सोनी की उपस्थिति में कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। बप्पा रावल नगर में कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. राजश्री गांधी वर्मा ने की, जबकि बौद्धिक नारायण ने दिया और संघचालक अरविंद मराठा उपस्थित रहे। इस अवसर पर नई टोली द्वारा की गई व्यवस्थाओं की विशेष सराहना की गई।
रामकृष्ण नगर में कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिलेश जोशी ने की। बौद्धिक श्रीवर्धन ने दिया और संघचालक रामेश्वर आमेटा की उपस्थिति रही। एकलिंग खंड के नाई ग्राम में महानगर सहकार्यवाह राहुल राठौड़, सुराणा ग्राम में विभाग घुमंतू कार्य प्रमुख पंकज, विवेकानंद नगर में महानगर कार्यवाह विष्णु शंकर नागदा तथा केशव नगर में डॉ. भारत भूषण ओझा ने बौद्धिक प्रस्तुत किया।
कार्यक्रमों के अंत में आद्य सरसंघचालक प्रणाम के अवसर पर घोष दल ने ‘केशवः’ रचना का वादन किया। ध्वजारोहण के समय ‘ध्वजारोपणम्’ तथा ध्वज प्रणाम के दौरान ‘ध्वज प्रणाम’ की धुन प्रस्तुत की गई। इसके बाद अवतरण और काव्यगीत की प्रस्तुति भी हुई। प्रार्थना के उपरांत घोष दल द्वारा ‘ध्वजावतरण’ रचना के वादन के साथ ध्वजावतरण सम्पन्न हुआ।
उत्सव में गणवेशधारी स्वयंसेवकों के साथ शहर के गणमान्य नागरिकों और मातृशक्ति की भी उल्लेखनीय उपस्थिति रही। ‘पंच परिवर्तन’ पर आधारित रंगोली कार्यक्रम का विशेष आकर्षण बनी रही।